NEET-PG कट-ऑफ घटाने से मेरिट पर असर नहीं पड़ा, सिर्फ ज्यादा छात्रों को मौका मिला — केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दोहराया अपना पक्ष

नई दिल्ली: NEET-PG के cut-off को अचानक काफी कम करने के फैसले को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने Supreme Court of India में अपना पक्ष साफ किया है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से मेरिट (योग्यता) पर कोई असर नहीं पड़ा, बल्कि सिर्फ ज्यादा छात्रों को काउंसलिंग में शामिल होने का मौका मिला है।


🧠 सरकार का क्या कहना है?

सरकार ने बताया कि यह फैसला 30 दिसंबर 2025 की एक अहम बैठक में लिया गया था, जिसमें National Board of Examinations in Medical Sciences द्वारा दिए गए डेटा का गहराई से विश्लेषण किया गया।

सरकार के अनुसार:

  • Cut-off कम करने से ranking system में कोई बदलाव नहीं हुआ
  • सभी admissions अब भी rank-based ही हो रहे हैं
  • यानी, जिसने अच्छा score किया है, उसे ही पहले सीट मिलेगी

👉 साफ शब्दों में: competition वही है, बस participate करने वाले students बढ़ गए हैं


📊 क्या बदला cut-off के बाद?

सरकार ने डेटा शेयर करते हुए बताया:

  • पहले लगभग 1.28 लाख छात्र eligible थे
  • Cut-off घटाने के बाद यह संख्या बढ़कर 2.24 लाख+ तक पहुंच सकती है

लेकिन ध्यान देने वाली बात 👇
👉 Ranking (merit order) बिल्कुल वही बनी रहती है


🏥 सीटें खाली क्यों रह रही थीं?

सरकार ने यह भी बताया कि:

  • Round 2 के बाद भी 9,621 सीटें खाली थीं
  • इनमें से 5,213 सीटें सरकारी कॉलेजों में थीं

👉 इसी वजह से cut-off कम किया गया ताकि:

  • सीटें खाली न रहें
  • medical infrastructure का सही use हो सके

⚖️ कोर्ट में क्या चल रहा है?

यह मामला एक याचिका के जरिए कोर्ट पहुंचा, जिसमें social worker Harisharan Devgan और अन्य लोगों ने इस फैसले को चुनौती दी है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है:

  • Cut-off को बहुत ज्यादा कम करना (यहां तक कि zero percentile तक)
    👉 medical education की quality को कमजोर कर सकता है

उनके वकील Satyam Singh Rajput ने कहा कि सरकार का focus सिर्फ सीटें भरने पर है, जो fairness और standards पर सवाल उठाता है।


🧾 सरकार का final stand

सरकार ने अपने affidavit में साफ कहा:

👉 Cut-off कम करना सिर्फ eligibility बढ़ाने के लिए था, किसी को extra advantage देने के लिए नहीं
👉 पूरा admission process transparent और rule-based online system से किया गया है


🧩 अब आगे क्या?

Supreme Court of India ने सरकार से सवाल किया है कि:

👉 Cut-off इतना कम करने से education standards कैसे maintain रहेंगे?

अब इस पर कोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है।


👉 Simple समझ लो:
Cut-off कम हुआ = ज्यादा students को chance
लेकिन
👉 Seat फिर भी उसी को मिलेगी जिसका rank बेहतर है

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