
कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग पर AI का असर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के कारण कंप्यूटर साइंस और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में छात्रों की रुचि कम हो रही है, जबकि मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन बढ़ रहे हैं। कई छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन एक्सपर्ट बताते हैं कि AI नई स्किल्स और अवसर भी पैदा कर रहा है।
कंप्यूटर साइंस में एडमिशन क्यों घट रहे हैं?
ASU के Ira A. Fulton Schools of Engineering के आंकड़ों के अनुसार, कंप्यूटर साइंस में एडमिशन 2024 में 5,844 से घटकर 2025 में 5,008 रह गए हैं। वहीं, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में भी छात्रों की संख्या 1,347 से घटकर 1,086 हो गई है।
छात्रों का कहना है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण उन्हें अपने भविष्य को लेकर चिंता होने लगी है। छात्रा बेथलहम तेजाजी (Bethelehem Tejeji) के अनुसार, अब केवल सहपाठियों के साथ ही नहीं, बल्कि कंपनियों द्वारा AI के इस्तेमाल के कारण भी मुकाबला करना पड़ रहा है। इसके चलते इंटर्नशिप और नौकरी पाने का दबाव पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है।
क्या AI सच में नौकरियां छीन रहा है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह डर पूरी तरह सही नहीं है। कंप्यूटिंग फील्ड के प्रोफेसर केविन गैरी के अनुसार, यह केवल ‘अनजान चीजों का डर’ है। उनका कहना है कि दुनिया में सॉफ्टवेयर की जरूरत कम नहीं हो रही, बल्कि लगातार बढ़ रही है।
केविन गैरी ने यह भी बताया कि एडमिशन घटने के पीछे कई कारण हैं—कुछ छात्र बिना मेजर तय किए कॉलेज में आ रहे हैं, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की संख्या कम हुई है, और जॉब मार्केट को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। उनका मानना है कि AI नौकरियां खत्म नहीं कर रहा, बल्कि नए स्किल्स की मांग बढ़ा रहा है। इसी वजह से ASU 2026 से AI से जुड़े नए कोर्स और सर्टिफिकेट शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग क्यों बन रही हैं पसंदीदा?
जहां कंप्यूटर साइंस में एडमिशन घट रहे हैं, वहीं मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ी है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन 2,795 से बढ़कर 3,287 हो गए हैं, जबकि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग 2,825 से बढ़कर 3,252 तक पहुँच गई है।
प्रोफेसर जेम्स मिडलटन के अनुसार, मैकेनिकल इंजीनियरिंग आज के सबसे उपयोगी फील्ड्स में से एक है। इस क्षेत्र में पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र एयरोस्पेस से लेकर बायोमेडिकल तक कई अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस फील्ड में औसतन सालाना करीब 1 लाख डॉलर की सैलरी मिलती है
AI का असर हर फील्ड पर
जहां कंप्यूटर साइंस में छात्रों के बीच AI को लेकर डर है, वहीं मैकेनिकल इंजीनियरिंग में इसे एक मददगार टूल के रूप में देखा जा रहा है। प्रोफेसर मिडलटन के अनुसार, AI डिजाइन और काम को बेहतर बना रहा है, नौकरियां नहीं छीन रहा।
छात्र भी मानते हैं कि मैकेनिकल जैसी फील्ड्स ज्यादा स्थिर हैं, क्योंकि इनमें हाथ से काम (hands-on work) ज्यादा होता है और पूरी तरह मशीनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।