
UP Board Result 2026 Latest Update:
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। इस बार बोर्ड ने कॉपियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया में कुछ बदलाव करने का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था के तहत परीक्षक अब केवल कॉपियां जांचकर अंक लिखने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें निर्धारित पोर्टल पर भी सीधे अंक दर्ज करने होंगे। माना जा रहा है कि इस नई व्यवस्था से रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में ज्यादा तेज और व्यवस्थित हो सकेगी। 📊
कॉपी जांच के साथ पोर्टल पर भी दर्ज होंगे अंक
यूपी बोर्ड ने इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। अब परीक्षक पहले की तरह उत्तर पुस्तिकाएं जांचेंगे और अवार्ड ब्लैंक पर अंक लिखेंगे, लेकिन इसके साथ-साथ उन्हें वही अंक माध्यमिक शिक्षा परिषद के ऑनलाइन पोर्टल पर भी दर्ज करने होंगे।
बोर्ड के अनुसार, इस बदलाव से रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया पहले से तेज हो जाएगी और मैन्युअल सिस्टम पर निर्भरता भी कम होगी। पहले रिजल्ट सिर्फ अवार्ड ब्लैंक में दर्ज अंकों के आधार पर तैयार किया जाता था, जिसके कारण कई बार डेटा एंट्री और रिकॉर्ड मिलान में ज्यादा समय लग जाता था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मूल्यांकन केंद्र से ही अंक सीधे ऑनलाइन दर्ज किए जाएंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और तेज होने की उम्मीद है। 📄
18 मार्च से कॉपी चेकिंग
यूपी बोर्ड की परीक्षाएं फिलहाल जारी हैं और हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा 12 मार्च तक चलेंगी। परीक्षा समाप्त होते ही कॉपियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है।
बोर्ड की योजना के मुताबिक 18 मार्च से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच शुरू हो सकती है। इसके लिए पहले सभी कॉपियों को संकलन केंद्रों पर एकत्र किया जाएगा। इसके बाद उन्हें ट्रकों के माध्यम से मूल्यांकन केंद्रों तक भेजा जाएगा।
कॉपियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है। ट्रकों के साथ ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए अलग वाहन रहेगा और किसी भी कर्मचारी को ट्रक में बैठने की अनुमति नहीं होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य कॉपियों की सुरक्षा और पूरी प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित करना है। 📄
परीक्षकों की नियुक्ति भी होगी ऑनलाइन
इस बार यूपी बोर्ड केवल अंक दर्ज करने की प्रक्रिया में ही बदलाव नहीं कर रहा है, बल्कि परीक्षकों की नियुक्ति भी ऑनलाइन माध्यम से की जाएगी। इसके लिए बोर्ड ने अपने पोर्टल पर पूरी व्यवस्था तैयार कर ली है।
जरूरत पड़ने पर मूल्यांकन केंद्रों के उप नियंत्रक प्रतीक्षा सूची में शामिल शिक्षकों को भी इसी पोर्टल के माध्यम से नियुक्त कर सकेंगे। इसके अलावा मूल्यांकन केंद्रों की निगरानी भी पहले से अधिक सख्त रखने की योजना है।
बोर्ड के अनुसार, परीक्षा केंद्रों के स्ट्रांग रूम की तरह ही कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मूल्यांकन केंद्रों पर भी नजर रखी जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। 📊
कॉपियां जांचने की सीमा भी तय
यूपी बोर्ड ने इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया में एक और अहम बदलाव किया है। अब हर उत्तर पुस्तिका के पेज पर केंद्रवार गोपनीय न्यूमेरिक नंबर दर्ज किए गए हैं, जिससे कॉपियों की पहचान और उनकी ट्रैकिंग करना आसान हो जाएगा।
इसके साथ ही बोर्ड ने परीक्षकों के लिए कॉपियां जांचने की अधिकतम सीमा भी तय कर दी है। इंटरमीडिएट के विज्ञान वर्ग में एक परीक्षक अधिकतम 600 कॉपियां ही जांच सकेगा, जबकि हाईस्कूल में यह सीमा 700 कॉपियों तक निर्धारित की गई है। वहीं कला वर्ग के परीक्षक अधिकतम 800 कॉपियां जांच पाएंगे।
बोर्ड का मानना है कि इस व्यवस्था से मूल्यांकन की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और जल्दबाजी में कॉपियां जांचने की समस्या भी काफी हद तक कम हो सकेगी। 📄
कॉपी जांचने का मानदेय और रोजाना लक्ष्य
मूल्यांकन कार्य में शामिल शिक्षकों के लिए मानदेय भी निर्धारित किया गया है। हाईस्कूल की एक कॉपी जांचने पर परीक्षक को 14 रुपये, जबकि इंटरमीडिएट की एक कॉपी जांचने पर 15 रुपये दिए जाएंगे।
रोजाना के लक्ष्य की बात करें तो एक परीक्षक आमतौर पर हाईस्कूल की करीब 50 कॉपियां और इंटरमीडिएट की लगभग 45 कॉपियां जांच सकेगा।
गौरतलब है कि साल 2025 में बोर्ड ने प्रायोगिक परीक्षाओं के अंकों को ऑनलाइन दर्ज कराने का प्रयोग किया था, जो सफल साबित हुआ था। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए अब लिखित परीक्षा के अंकों को भी सीधे पोर्टल पर दर्ज कराने की व्यवस्था की जा रही है। भविष्य में अवार्ड ब्लैंक की प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त करने की योजना भी बनाई जा रही है। 📄