BTech : लिखित परीक्षा में शून्य अंक होने पर भी दे सकेंगे एंड सेमेस्टर परीक्षा, IIIT ने बदले नियम

इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए एक अहम बदलाव सामने आया है। देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शामिल Indian Institutes of Information Technology ने बीटेक छात्रों की परीक्षा प्रणाली से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है।

नए नियमों के अनुसार अब छात्र लिखित परीक्षा में शून्य अंक आने के बावजूद भी एंड सेमेस्टर परीक्षा में बैठ सकते हैं, यदि वे मिड-सेमेस्टर और आंतरिक मूल्यांकन के कुल अंकों में न्यूनतम आवश्यक प्रतिशत प्राप्त कर लेते हैं। इस बदलाव को छात्रों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है क्योंकि पहले की तुलना में अब परीक्षा में बैठने के नियम अधिक लचीले बनाए गए हैं।

यह निर्णय खासतौर पर उन छात्रों के लिए मददगार साबित हो सकता है जो किसी एक परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते लेकिन पूरे सेमेस्टर के दौरान अन्य गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

क्या है नया नियम?

नए नियम के अनुसार एंड सेमेस्टर परीक्षा में बैठने के लिए अब छात्रों को मिड-सेमेस्टर और आंतरिक मूल्यांकन के कुल अंकों में न्यूनतम प्रतिशत हासिल करना होगा

इस प्रणाली में कुल 60 अंक मिड सेमेस्टर और आंतरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित होते हैं।

अंकों का वितरण इस प्रकार है:

  • मिड सेमेस्टर परीक्षा – 25 अंक
  • आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) – 35 अंक

इन दोनों को मिलाकर छात्र को कम से कम 23.75 प्रतिशत अंक प्राप्त करना जरूरी होगा।

यदि छात्र इस कुल प्रतिशत को हासिल कर लेते हैं, तो वे एंड सेमेस्टर परीक्षा में बैठने के पात्र होंगे। यहां तक कि अगर किसी छात्र को मिड सेमेस्टर लिखित परीक्षा में शून्य अंक भी मिलते हैं, तब भी वह एंड सेमेस्टर परीक्षा दे सकता है, बशर्ते आंतरिक मूल्यांकन में उसके अंक पर्याप्त हों।


पहले क्या था नियम?

इस बदलाव से पहले परीक्षा प्रणाली काफी सख्त थी। छात्रों को एंड सेमेस्टर परीक्षा में बैठने के लिए दोनों घटकों में अलग-अलग न्यूनतम अंक हासिल करना अनिवार्य था

पुराने नियम के अनुसार:

  • मिड सेमेस्टर परीक्षा में कम से कम 6 अंक जरूरी थे
  • आंतरिक मूल्यांकन में कम से कम 8.5 अंक जरूरी थे

अगर कोई छात्र इन दोनों में से किसी एक में भी न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाता था, तो उसे एंड सेमेस्टर परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिलती थी।

इस कारण कई छात्रों को पूरे सेमेस्टर की पढ़ाई के बावजूद सिर्फ एक परीक्षा में कम अंक आने के कारण एंड सेमेस्टर से बाहर होना पड़ता था।


नियम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?

शैक्षणिक संस्थानों में लगातार यह चर्चा हो रही थी कि केवल एक परीक्षा के आधार पर छात्र की क्षमता का आकलन करना सही नहीं है।

कई बार ऐसा होता है कि छात्र:

  • किसी कारणवश मिड सेमेस्टर परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते
  • स्वास्थ्य या मानसिक दबाव के कारण एक टेस्ट खराब हो जाता है
  • लेकिन पूरे सेमेस्टर में उनकी पढ़ाई और प्रोजेक्ट वर्क अच्छा होता है

इसी को ध्यान में रखते हुए यह नया नियम लागू किया गया है ताकि छात्रों के समग्र प्रदर्शन (overall performance) को महत्व दिया जा सके।


छात्रों के लिए क्या होगा फायदा?

नए नियम से इंजीनियरिंग छात्रों को कई फायदे मिलेंगे।

1. परीक्षा का दबाव कम होगा

पहले छात्र मिड सेमेस्टर परीक्षा को लेकर काफी तनाव में रहते थे क्योंकि उसी पर एंड सेमेस्टर में बैठने की पात्रता निर्भर करती थी। अब यह दबाव कम हो जाएगा।

2. समग्र मूल्यांकन प्रणाली

अब छात्रों का मूल्यांकन केवल एक परीक्षा के आधार पर नहीं बल्कि पूरे सेमेस्टर के प्रदर्शन के आधार पर होगा।

3. पढ़ाई में निरंतरता

छात्रों को पूरे सेमेस्टर में पढ़ाई पर ध्यान देने की प्रेरणा मिलेगी क्योंकि आंतरिक मूल्यांकन और अन्य गतिविधियों का महत्व बढ़ जाएगा।

4. असफलता से उबरने का मौका

यदि किसी छात्र का एक टेस्ट खराब हो जाता है, तो उसके पास बाकी मूल्यांकन के जरिए अपने अंक सुधारने का अवसर रहेगा।


क्या इसका मतलब है कि छात्र आसानी से पास हो जाएंगे?

नहीं। इस नियम का मतलब केवल इतना है कि छात्र एंड सेमेस्टर परीक्षा में बैठ सकते हैं

पास होने के लिए उन्हें अभी भी:

  • एंड सेमेस्टर परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करना होगा
  • कुल अंकों और ग्रेडिंग प्रणाली के नियमों को पूरा करना होगा

इसलिए यह बदलाव केवल परीक्षा में बैठने की पात्रता को आसान बनाता है, पास होने के मानदंड वही बने रहेंगे।


शिक्षा व्यवस्था में क्या संकेत देता है यह बदलाव?

हाल के वर्षों में भारत के कई तकनीकी संस्थान परीक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और छात्र-अनुकूल (student-friendly) बनाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।

यह बदलाव भी उसी दिशा में एक प्रयास माना जा रहा है। इससे छात्रों को यह संदेश मिलता है कि शिक्षा प्रणाली अब केवल एक परीक्षा पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि समग्र विकास और निरंतर सीखने को महत्व दे रही है।


निष्कर्ष

बीटेक छात्रों के लिए परीक्षा प्रणाली में किया गया यह बदलाव एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। इससे छात्रों को अपने प्रदर्शन को सुधारने के अधिक अवसर मिलेंगे और वे एक परीक्षा के दबाव में आने के बजाय पूरे सेमेस्टर में बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकेंगे।

Indian Institutes of Information Technology द्वारा लागू किया गया यह नया नियम आने वाले समय में अन्य तकनीकी संस्थानों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

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