यूपी बोर्ड 2026: पहले दिन जांची गईं 9.42 लाख कॉपियां, कमांड सेंटर से की जा रही ऑनलाइन निगरानी

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू हो गया है। पहले दिन 70,025 परीक्षकों ने 9.42 लाख कॉपियां जांचीं।

📚 यूपी बोर्ड कॉपी जांच 2026: पहले दिन 9.42 लाख कॉपियों का मूल्यांकन

हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का काम बुधवार से शुरू हो गया। कुछ प्रधानाचार्यों द्वारा अंकेक्षक और उप प्रधान परीक्षक (DHE) बनाए जाने का विरोध भी देखने को मिला, लेकिन इसके बावजूद पहले ही दिन करीब 9.42 लाख कॉपियों की जांच पूरी कर ली गई 😊

इस प्रक्रिया में लगभग 70,025 परीक्षकों ने हिस्सा लिया। पूरे मूल्यांकन कार्य की निगरानी यूपी बोर्ड मुख्यालय में बने स्टेट लेवल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से ऑनलाइन की जा रही है 📊


📝 परीक्षकों को दिए गए जरूरी निर्देश

मूल्यांकन शुरू होने से पहले सभी परीक्षकों को केंद्र पर साफ-साफ निर्देश दिए गए, ताकि कोई गलती न हो:

🔸 क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसकी पूरी जानकारी दी गई
🔸 हर परीक्षक को बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करनी होगी
🔸 हर कॉपी पर परीक्षक कोड और सिग्नेचर करना अनिवार्य है


⏳ कब तक पूरा होगा मूल्यांकन?

हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की करीब 2.60 करोड़ कॉपियों की जांच 1 अप्रैल तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है 📅


⚠️ मूल्यांकन के लिए जरूरी नियम

🔸 रोजाना निर्धारित संख्या के अनुसार ही कॉपियां जांचें
👉 हाईस्कूल: 50 कॉपियां
👉 इंटरमीडिएट: 45 कॉपियां

🔸 ज्यादा पैसे कमाने के लिए जरूरत से ज्यादा कॉपियां जांचने की कोशिश न करें
👉 ऐसा करने पर इसे सतही मूल्यांकन माना जाएगा और कार्रवाई हो सकती है ⚠️

🏫 प्रधानाचार्यों की ड्यूटी ऐच्छिक करने की मांग

यूपी में चल रहे बोर्ड मूल्यांकन के बीच अब प्रधानाचार्यों की ड्यूटी को लेकर नई मांग सामने आई है।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश महामंत्री संतोष शुक्ल ने यूपी बोर्ड सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि प्रधानाचार्यों की ड्यूटी को ऐच्छिक (optional) किया जाना चाहिए 😊


📚 क्यों उठी यह मांग?

प्रधानाचार्यों का कहना है कि इस समय वे कई जरूरी कामों में पहले से ही व्यस्त हैं:

🔸 नए सत्र के लिए एडमिशन प्रक्रिया चल रही है
🔸 वार्षिक परीक्षा के रिजल्ट तैयार किए जा रहे हैं
🔸 कॉलेजों में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत निर्माण कार्य जारी है 🏗️
🔸 अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभानी होती हैं

👉 ऐसे में मूल्यांकन का अतिरिक्त काम करना उनके लिए काफी कठिन हो रहा है


⚖️ क्या है उनका सुझाव?

🔸 अगर ड्यूटी को स्वैच्छिक (optional) कर दिया जाए, तो किसी पर दबाव नहीं रहेगा
🔸 जो इच्छुक हों, वही इस कार्य में शामिल हों
🔸 इससे काम भी बेहतर तरीके से हो सकेगा और किसी को परेशानी भी नहीं होगी


📢 अन्य संगठनों की राय

राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है।
उन्होंने प्रधानाचार्यों को अंकेक्षक बनाना पद की गरिमा के खिलाफ बताते हुए उन्हें इस ड्यूटी से मुक्त करने की मांग की है।

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